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29 Nov 2018

उत्तराखंड की प्रमुख जनजाति


उत्तराखंड की प्रमुख जनजातिथारू, जौनसारी, भोटिया, बोक्सा, राज़ी (वनरावत)उत्तराखंड में सर्वाधिक जनसंख्या वाली जनजाति थारूउत्तराखंड में सबसे कम जनसंख्या वाली जनजाति राज़ी (वनरावत)(2.5%)भोटिया जनजाति मुख्यतः निवास करती है  उत्तरकाशी, चमोली, एवं पिथोरागढ़ भोटिया जनजाति किस जाति से सम्बन्ध रखते है  मंगोलियनभोटिया जनजाति के पुरुष की वेशभूषा है रंगा, खगचसी, बाँखे आदि  
भोटिया जनजाति की महिला की वेशभूषा है च्न्यूमाला, च्यूकला, च्युब्ती, च्युज्य  पिथोरागढ़ की भोटिया जनजाति के लोग कहलाते है जौहारी व शौका चमोली की भोटिया जनजाति के लोग कहलाते है मारछा एवं तोरछा                                             उत्तरकाशी की भोटिया जनजाति के लोग कहलाते है जाड़ जाड़ भोटिया स्वयं को मानते है जनक के वंशजाड़ भोटियाओ की भाषा  रोम्बा 
जाड़ भोटियाओ के मुख्य त्यौहार लौहसर व शूरगैनसर्वाधिक भोटिया जनजाति वाल जिला पिथौरागढ़भोटिया जनजाति के लोगो के  ग्रीष्मकालीन आवास कहलाते है मैतभोटिया जनजाति के लोगो के शीतकालीन आवास कहलाते है  गुण्डा या मुनसा
भोटिया जनजाति के लोगो का मुख्य भोजन है छाकू, छामा, कूटोभोटिया जनजाति के लोगो का प्रिय पेय पदार्थ है ज्या(चाय), छंग(मदिरा ) भोटिया जनजाति के लोगो का मुख्य व्यवसाय कृषि पशुपालन एवं व्यापारभोटिया जनजाति के लोगो का मुख्य वाधयंत्र है छुडके
भोटिया जनजाति के लोगो में विवाह की कितनी पधतिया प्रचलित है2 (तत्सम, दामोला)उत्तराखंड विधानसभा में अनुसूचित जनजाति हेतु कुल सुरक्षित सीटें 2उत्तराखंड राज्य में सर्वाधिक अनुसूचित जनजाति वाला जिला  ऊधमसिंह नगर (7.46%)उत्तराखंड राज्य में सबसे कम अनुसूचित जनजाति वाला जिला  रुद्रप्रयाग (.14%)
उत्तराखंड में कहाँ सर्वाधिक जौनसारी जनजाति पायी जाती है जौनसार –बावरजौनसारी किस जाति से सम्बन्ध रखते है मंगोल व डोमो का मिश्रित रूपजौनसारी स्वयं को मानते है पांडवो का वंशज
जौनसारियों का मुख्य व्यवसाय कृषि एवं पशुपालनजौनसारी पुरुषो की वेशभूषा कोट, सूती टोपी कुर्ता आदिजौनसारी महिलाओ की वेशभूषा  घाघरा, चोली, अंगोली आदिजौनसारी व भोटिया के लोग किस धर्म को मानते है  हिन्दू धर्म कोजौनसार के लोगो के मुख्य देवता है  महासू(शिव)जौनसार-बावत क्षेत्र का सबसे बड़ा मेला  विस्सू मेला (देहरादून)जौनसारियों का प्रमुख तीर्थ स्थल  हनोलजौनसारियों का परिवार है  संयुक्त एवं पित्रसत्तात्मकफादर ऑफ़ जौनसारी नाम से सम्मानित है  भाव सिंह चौहानजौनसारियों में विवाह के लिए प्रचलित पद्धतिया है  3
जौनसारी संगीत के जनक  नन्दलाल भारती (जौनसार रत्न)जौनसार के प्रथम कवि  पंडित शिवरामजौनसार के लोगो के मुख्य हथियार तलवार, फरसा, कटारजौनसारी ले लोगो का मुख्य भोजन है चावल, दाले, मांस, शराब आदिवीर केसरी मेला कब लगता है 3 मई को (शहीद केशरी चन्द की स्मृति में)
जौनसारियों का त्यौहार जागड़ा मनाया जाता हैभाद्रपद में (जौनसारी)नुणाई त्यौहार मनाया जाता है  भटाड़ मानथात (लाखामंडल, देहरादून)वीर केसरी मेला कहा लगता है चैलीथाप (चकराता)बोक्सा जनजाति के लोगो का निवास स्थान है रामनगर, उधमसिंह नगर के बाजपुर पौड़ी के दुगड्डा एवं डोईवाला (देहरादून)बोक्सा जनजाति के लोग  स्वयं को मानते है पवांर वंशीय राजपूतबोक्सा जनजाति के लोगो का समाज है संयुक्त व पितृसत्तात्मक
सर्वाधिक बोक्सा जनसंख्या निवास करती है उधमसिंह जनपदबोक्सा जनजाति की प्रमुख 5 उपजातियां है जादुवंशी, पंवार, परतज़ा , राजवंशी ,तनुवारबोक्सा लोगो की सबसे पूजनीय देवी है  बाला सुंदरी (काशीपुर)बोक्सा के प्रमुख देवी देवता है शिव, दुर्गा, हुल्का देवी, साकरिया देवता, ज्वालादेवीबोक्सा लोगो के प्रमुख पर्व है  चैती, नौबी, रामलीला, दीपावली, तेरस, होली आदि    बोक्सा लोगो के प्रमुख मेला है चैती मेलाबोक्सा समुदाय का मुख्य भोजन है  माँस, मछली, चावलबोक्सा समुदाय का मुख्य व्यवसाय  कृषि आखेट, दस्तकारी देहरादून में निवास करने वाली बोक्सा जनजाति कहलाती है महर बोक्सा   
नैनीताल एवं उधमसिंह नगर में बोक्सा जनजाति बाहुल्य क्षेत्र कहलाता है  बुकसाडबोक्सा जनजाति की मुख्य भाषाएँ है भांवरी, कुमैय्या, रचभैंसी    बोक्सा जनजाति के पुरुषों की वेशभूषा है धोती, कुर्ता, पगड़ी आदि  बोक्सा जनजाति की स्त्रियों की वेशभूषा हैलहंगा, चोली, साड़ी, ब्लाउज     बोक्सा जनजाति में जादू-टोना तंत्र-मन्त्र विद्या के जानकार व्यक्ति को कहा जाता था भरारेथारू जनजाति के लोगो का निवास स्थान है खटीमा, सितारगंज, किच्छा, नानकमत्ता, बनबसा आदि         थारू जनजाति के लोग  स्वयं को मानते है राणा प्रताप के वंशज
थारुओ के शारीरिक लक्षण किस प्रजाति से मिलते है मंगोल प्रजाति सेइतिहासकारों के अनुसार थारुओ का वंशज माना जाता है किरात वंशथारू जनजाति के लोगो का मुख्य व्यवसाय है कृषि, आखेट, पशुपालन  थारू जनजाति के लोगो का मुख्य भोजन है चावल, मछलीथारू जनजाति के लोगो का प्रिय पेय पदार्थ है जाड़ (चावल की शराब)थारू समाज है  मातृसत्तात्मक  थारू जनजाति के पुरूषों की वेशभूषा है लंगोटी, कुर्ता, टोपी, साफा एवं सफ़ेद धोती  थारू जनजाति स्त्रियों की वेशभूषा हैलहंगा, चोली, आभूषण  थारू समाज के प्रमुख देवी देवता है पछावन, खड्गाभूत काली, भूमिया, कलुवा, आदि    थारू लोग दीपावली को किस पर्व के रूप में मानते है शोक के पर्व के रूप मेंथारु जनजाति के लोगो में विवाह की कितनी पधतिया प्रचलित है4थारु जनजाति में विधवा विवाह के बाद दिए जाने वाला भोजन कहलाता है लठभरता भोजन   थारु जनजाति में सगाई की रस्म कहलाती है अपना-पराया  थारु जनजाति के मुख्य त्यौहार है दशहरा, होली, दीपावली, बज़हर,माघ की खिचड़ी आदि   थारु जनजाति की प्रमुख कुरियां (गोत्र) है  बाडवायक, बट्ठा रावत वृत्तियाँ, महतो व डहैतथारु जनजाति में विवाह की पधतिया है अपना-पराया, बात-कट्ठी, विवाह, चाला
उत्तराखंड की सबसे कम जनसंख्या वाली जनजाति हैराजी (वनरावत)राजी जनजाति मुख्यतः निवास करती है  कनालीछीना, डीडीहाट, धारचूला, नैनीताल, चम्पावत   राजी जनजाति स्वय को मानते है  रजवार (राजपूत)राज्य में सर्वाधिक राजी जनजाति कहाँ निवास करती है पिथौरागढ़
राजी जनजाति के लोगो का मुख्य भोजन है मांस, कन्दमूल फल, मंडुवा, मक्का, भट्ट तथा तरुड़     राजी जनजाति के लोगो का मुख्य व्यवसाय है  आखेट, पशुपालन एवं कृषिराजी जनजाति की मातृभाषा है  मुण्डाराजी जनजाति द्वारा सामान्यतः प्रयुक्त होने वाली भाषा है कुमाऊनीराजी जनजाति के लोगो अधिकाशतः कैसे आवासों में निवास करते है झोपड़ियो में
राजी जनजाति के आवास कहलाते है  रौत्युड़ा या रौत्यांश  राजी जनजाति के प्रमुख देवी-देवता है नंदादेवी, बाघनाथ, मलैनाथ, गणेनाथ, सैम, छुरमुल आदि      राजी जनजाति के मुख्य त्यौहार है कर्क एवं मकर संक्रांति, गोरा अट्ठावली  राजी जनजाति के लोगो का विशेष नृत्य कहलाता है रिघडांसराजी जनजाति के लोगो में विवाह में से पूर्व प्रचलित पद्दतिया है 2 (सांगजांली तथा पिंठा)राजी किस शिल्प कला में निपुण होते है  काष्ठ शिल्पकलाप्रारंभ में राजियों में विनिमय की कौन सी प्रथा प्रचलित थी मूक विनिमय प्रथाx

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